• अपनी बात

    साथियों, “कव्य प्रवाह” के माध्यम से मैं अपनी कविताओं तथा रचनाओं को “हिन्दी-साहित्य” को समर्पित करता हूं। मैं यह् आशा करता हूं कि आपको मेंरा यह प्रयास पसंद आयेग। साथ ही मैं आपसे यह अपेक्षा रखता हू कि आप अपने सुझावों मार्ग दर्शन की शब्द पंखुड़ियों से मेंरा मार्ग दर्शन करते रहें।

  • साहित्यिक मंच

    “काव्य प्रवाह” ऎसा साहित्यिक मंच है जिसे प्रचार कि इस तकनीक के द्वारा “हिन्दी साहित्य” को सुगमता से आम लोगों तक पहुंचाने के महति उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है। आप अपनी रचनाओ द्वारा “हिन्दी साहित्य” को इस तकनीक से अपना अमूल्य योगदान प्रदान कर सके यही हमारा प्रयास ह।

  • आमंत्रण

    “काव्य प्रवाह” के माधयम से हम आपको आमंत्रण देते हैं कि यदि आप अपनी साहित्यिक प्रतिभा को पहचान देना चाहते है तो आप “हिन्दी साहित्य मंड़ल” से अधिक से अधिक संख्या में हमसे जुड़ें हमारी कवि गोष्ठियों में शामिल हों तथा अपनी कविताओ के माध्यम से साहित्य के अकाश में अपना परचम लहराएं।

  • श्री गोपाल जी सोलंकी

    श्री गोपाल जी सोलंकी का जन्म राजस्थान में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। श्री सोलंकी के पिता वषों पहले रायपुर घूमने के नाम पर आये थे लेकिन रायपुर की धरती और वातावरण ने उन्हें इतना आकर्षित किया कि उन्होने यही बसने का फैसला कर लिया। परिवार को आर्थिक विषमताओं से बचाने के लिये श्री सोलंकी ने बचपन से ही अपने पिता के साथ व्यापार में हाथ बंटाना शुरु कर दिया जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह गई,लेकिन शिक्षा और साहित्य से उनका मोह लगातार बना रहा तथा वे अपने व्यस्त समय से कुछ समय निकाल कर कविता लिखते रहे। साहित्य के प्रति यही रुझान उन्हें “हिन्दी साहित्य मंड़ल” के अध्यक्ष श्री अमरनाथ त्यागी के संपर्क मे लाया।कार्य के प्रति निष्ठा एवं साहित्य के प्रति लगन को देखते हुए श्री त्यागी ने उन्हें “हिन्दी साहित्य मंड़ल” का सचिव बनाया।हिन्दी साहित्य के प्रति उनके इसी लगन तथा अनेक महति उद्देश्यों ने उन्हें “काव्य प्रवाह्”बनाने के लिये प्रेरित किया जो आज आपके अवलोकन के लिये प्रस्तुत है।

  • उद्देश्य

    • रचना कारों की कृतियों रचनाओं को मंच प्रदान करना
    • नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करना
    • युवाओं को हिन्दी साहित्य से जुड़ने के लिये प्रेरित करना
    • जन-जन में हिन्दी साहित्य को प्रतिष्ठित करना
    • रचनाकारों की कृतियों रचनाओं को ई-बुक बनाने की सुविधा
    • साहित्यक गतिविधियों से सम्बन्धित एक पत्रिका का प्रकाशन
    • काव्य प्रवाह को बगैर हानि-लाभ के संचालित करना
    • सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय के भाव से कार्य करना
  • अनमोल वचन

साहित्य प्रेमियों के लिये उपलब्ध एकमात्र वेबसाईट

“काव्य प्रवाह” सभी साहित्य प्रेमियों से विनम्र निवेदन करता है कि प्रचार के इस अधुनिक माधयम को अपना कर हिन्दी साहित्य की सेवा करें।

मेंरे प्रेरणा स्त्रोत

  • Swami-Vivekananda

  • mahatma gandhi

  • sardar-patel

  • Vajpayee

  • narendra modi.jpeg