अब ये नकाब क्यूँ

  1. shbab . ab ye nkab kyun
  2. tridevi . ab ye nkab kyun
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अब ये नकाब क्यूँ

पहले तो रूबरू थे ,        अब ये नकाब क्यूँ
मिलते थे खुलके पहले ,अब ये हिजाब क्यूँ
पहले तो
रहते हिजाब में वो ,     जब से सबाब आया
दुश्मन बना ये अपना ,  उनका हिजाब क्यूँ
पहले तो
कबसे तड़प रहे हैं ,       दीदार को हम उनके
चाँद बन के छत पर ,        आए नहीं वो क्यूँ
पहले तो
उलझ गया है ये मन ,      बेगाने पं से उनके
अपनों से पर्दा दारी का        , ये रिवाज क्यूँ
पहले तो
छुपने लगे हमसे ,      कतरा के निकलते है
बचपन के साथियों से ,     ऐसा हिसाब क्यूँ
पहले तो
जी चाहता है पूछें ,        रोक कर के उनको
हम हो गए पराए ,          कबसे जनाब क्यूँ
पहले तो
पैगाम ने हमारे        ,    पाई ना वो तवज्जो
भेजा नहीं जनाब ने ,     अब तक जवाब क्यूँ
पहले तो
उत्तर किसी सवाल का ,गोपाल मिल ना पाया
खाली पड़ी ये इश्क की ,   अपनी किताब क्यूँ
पहले तो

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. अब ये नकाब क्यूँ

    पहले तो रूबरू थे , अब ये नकाब क्यूँ
    मिलते थे खुलके पहले ,अब ये हिजाब क्यूँ
    पहले तो
    रहते हिजाब में वो , जब से सबाब आया
    दुश्मन बना ये अपना , उनका हिजाब क्यूँ
    पहले तो
    कबसे तड़प रहे हैं , दीदार को हम उनके
    चाँद बन के छत पर , आए नहीं वो क्यूँ
    पहले तो
    ab ye nkab kyun
    jan kavi .gopal ji solanki