असमंजस

asamanjasयह कहानी जरा विचित्र है और यह विचित्रता भी काफी मनोरंजक है इसमें दो पात्र है जगपाल जी और आलोक जी जगपाल जी एक भूतपूर्व व्यापारी है ऐसा किस लिए क्योकि नौकरी पेशा भूतपूर्व लिखते है क्योकि उन्हें सरकार साठ या बासठ साल के बाद रिटायर कर देती और वे जिस पद से रिटायर होते है ।

अपने नाम के साथ भूतपूर्व जज या जिस भी पद से वे रिटायर हुए है उस पद को साथ में लगाते है इससे समाज में उनका मान बढ़ता है लेकिन हमारे जगपाल जी के साथ ऐसा कुछ नहीं है वे अपने व्यवसाय में काफी सफल रहे अपने बच्चों को अच्छी परवरिस देने के साथ उनका शादी ब्याह भी अच्छे घरो में हो गया एक लड़का सिविल सेवा में था और एक लड़का उनके साथ उनके कार्य में हाथ बटाता सब कुछ ठीक चल रहा था एक दिन उन्होंने अपने बड़े लडके को जो की उनके साथ व्यवसाय में हाथ बंटाता था से कहा मैं अब अपने कार्य से रिटायर मेंट लेना चाहता हूँ और अपना बाकी समय साहित्य की सेवा में देना चाहता हूँ।

बड़े लडके ने कहा ठीक है आप कुछ समय मेरे साथ बैठिये मैं धीरे धीरे काम सम्हाल लूँगा तब आप आवकास ले लेना यह तय होने के बाद उनके लडके ने अपना ध्यान व्यवसाय में ज्यादा लगाना सुरु किया और सारे लेनदेल खुद ही करने लगा और फिर वे भी धीरे से दूसरी गतिविधयों में मसरूफ होने लगे उन्होंने सीनियर सिटीजन की सदस्यता ले ली और साहित्य की गोष्ठियों में जाना सुरु किया ।

साहित्य की दुनिया में आए तो उन्हें पता चला की वहां आने वाले साहित्य कारों की काफी पुस्तके निकल चुकी है अत:उन्होंने भी एक पुस्तक छपवाने का निर्णय लिया और एक परिचित प्रकाशन में पहुंच गए वहां उनकी मुलाक़ात आलोक जी से हुई बात बात में जब उन्होंने बताया की मैं अपनी कविता खुद टाईप करता हूँ और फेसबुक में अपनी कविताएँ डालता रहता हूँ तो उन्होंने सजेस्ट किया की आप अपनी कविताओं को अपने खुद के बेब साइड में डालिए इससे आप को ज्यादा ट्रैफिक मिलेगा और आप की कविताएँ ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगी उन्हें भी यह बात पसंद आ गई ।

बेब साइड बनाने की बात कौन बनाएगा तो उन्होंने कहा आपके सामने जो शख्स बैठा है वही आपकी बेब साइड बनाएगा उन्होंने बात मंजूर कर ली उन्होंने कहा आप को बेब साइड का कम से कम 1500 रुपया लगेगा और ज्यादा वाली के लिए तो  बारह हजार में भी बनती है पर आप इस की चिंता मत करिए आप मेरी भरपाई दुसरे तरीके से कर देना एक दिन बेब साइड बन गई उन्होंने कहा इसमें आप को रोज एक कविता या लेख डालना है और इसमें अपने लोगों को जोड़ना है वे बड़े खुश हुए ।

वे  इमानदारी से अपनी बेब साइड में रोज कुछ ना कुछ लिख कर डालने लगे फिर उन्होंने अपने कुछ परिचितों से उसमे जुड़ने का आग्रह किया उन्होंने उसमे जुड़ने के लिए दी गई प्रक्रिया से जुड़ना चाहा पर वे इसमें सक्सेस नहीं हो पाए तब इन्होने आलोक जी से कहा तो उन्होंने कहा वे नही जुड़ पाएंगे बात आई गई हो गई आलोक जी की मांगी रकम उन्होंने उन्हें अदा कर दी थी लेकिन उनकी चाहत पूरी नहीं हो रही थी उसमे न्यूज का बाक्स था पर न्यूज डालने पर उसकी हेड लाइन शो नहीं हो रही थी वीडियो डालने पर उनकी बेब साइड उसे एक्सेप्ट नहीं कर रही थी।

उनकी बेब साइड उनकी रचनाओं से भर्ती जा रही थी पर ना तो उनके साथी उसमे मेम्बर बन सकते थे और नाही न्यूज डालने पर डिस्प्ले होती थी इधर आलोक जी का कहना था की आप मेरे लिए मार्केटिंग करिए अब जगपाल जी के सामने समस्या ये है की जिस बेब साइड के वो मालिक है उसमे ही वे अपने मन मुताबिक़ कार्य नहीं कर सकते थे तो उसकी मार्केटिंग कैसे करे वे कहते अपने बेब साइड की लांचिंग कर दीजिए जिस बेब साइड में वे सिर्फ कविता या फोटो के अलावा कुछ कर ही नहीं सकते थे उसकी मार्केटिंग या लांचिग कैसे करते ।

जब जगपाल जी अपनी समस्या उनसे कहते तब वे कह देते नही होगी वीडियो नही आएगा न्यूज बाक्स में नहीं दिखेगा विज्ञापन बाक्स नहीं होने से विज्ञापन भी नहीं ले सकता वे कहते है पहले विज्ञापन ले आओ अरे भाई जब हम अपनी सारी खूबियों का सामने वाले के सामने डिस्प्ले करेंगे तभी तो वह हमारी बात को सुनेगा या माने गा क्या हमारे कह देने भर से कोई बेब साइड बनवा लेगा जब भी जगपाल जी अपनी बात कहने की कोशिश करते है तब उनका एक ही जवाब होता है आप चुप रहिए अपनी कल्पनाओं के घोड़े पे सवार आलोक जी ये क्यों नही समझते की दुनिया कल्पना से नहीं हकीकत की जमीन पर कुछ कार्य करने से प्रभावित होती है ।

आज भी उनके खाते में एक भी संतुस्ट बेब साइड बनवाने वाला नहीं है जिसे वे गर्व के साथ इंट्रोड्यूस कर सके क्योकि वे सामने वाले की रिक्वायरमेंट पर ध्यान नही देते और उसके कहने पर साफ़ कह देते है ऐसा नहीं होगा अगर आप मुझे समझाने की कोशिश करोगे तो मैं आज ही आपकी बेब साइड को बंद कर दूंगा आप व्यापार करना चाहते हो और व्यापार के किसी नियम को फालो नहीं करना चाहते तो व्यापार कैसे होगा ?जब मैंने अपनी पुस्तक उस प्रकाशन में छपने दी तो उन्होंने मेरी पुस्तक में जितनी गलतियाँ या कमियां थी उसे सुधारने के लिए मैंने जितनी बार माँगा मुझे उसकी कापी उपलब्ध करवाई और आखिरी बार मेरे हां कहने पर ही पुस्तक की छपाई करवाई उसके बाद भी जब हमने कहा इसमें आई एस बी एन नम्बर नही डाले गए हैं तो उन्होंने नम्रता पूर्वक अपनी भूल सुधार कर हमें संतुस्ट किया।

हमें आलोक जी से यही कहना है की अगर आप अपने हुनर की कीमत पाना चाहते है तो आप को खरीददार की हर डिमांड पर ध्यान देना होगा और अपने व्यवहार में नम्रता और सामंजस्य बिठाना होगा जब आप सामने वाले की बात पूरी तरह सुनेगे और उसका काम उसकी मन मुताबिक़ करेंगे तो आप को किसी और से मार्केटिंग के लिए नहीं कहना पड़ेगा लोग खुद आप के पास आएँगे उन्हें सच्ची सेवा दीजिए मन से दीजिए दुनिया को संतो ने झूठी कहा है पर हमें तो इसी माया मय दुनिया में रहना है आज जिस टेक्नोलाजी के आप खुद को ऑनर कहते है अगर उसी की सेवा आप ढंग से नहीं देंगे तो आप कैसे अपना बिजनेस बढ़ा पाएंगे ?

हम जगपाल जी की बातों से समझ गए की उनका सोचना सही है अगर कोई अपनी चीज बेचना चाहे तो उसे अपने माल की गुणवत्ता की परिक्षण करानी होगी और आलोक जी के लिए जगपाल जी जैसे समर्पित लेखक और व्यापार में अपने जीवन का सारा अनुभव प्राप्त व्यक्ति से मुलाक़ात होना और उनके अनुसार अपनी बेब साइड बनवाना सभी एक अवसर की तरह था पर क्योकि जगपाल जी इस इंटरनेट की दुनिया के व्यक्ति नहीं थे इलेक्टानिक स्टुमेंट के बारे में ज्यादा नहीं जानते हुए भी उनकी बात मान कर उनसे अपनी बेब साइड बनवाने की हामी भरना उनकी सकारात्मक सोच को दर्शाता है वे सचमुच आलोक जी की सहायता करना चाहते थे पर आलोक जी अपने कल्पना लोक से बाहर आना नहीं चाहते।

जो व्यक्ति अपनी खुद की मदद नही कर सकता उसकी मदद कोई करना चाहे तो भी नही कर सकता अगर आलोक जी हवा में उड़ना छोड़ कर हकीकत की दुनिया में आ जाएं और अपने सुभ चिंतको की रिक्वायर मेंट पर ध्यान देना सुरु कर दे तो उनकी मन चाही मुराद पूरी हो सकती है जगपाल जी किस विस्वास से उनकी मार्केटिंग करे की आप सामने वाले की चाहि गई सेवा उसे देंगे आप तो तुरंत कह देते है की ऐसा नहीं होगा किसी की जेब से पैसा निकालना इतना सरल नहीं है और अपनी चीज बेचने के बाद की सेवा तो और भी अच्छी देनी होती है जिससे वह संतुस्ट हो और आपके लिए खुद होकर मार्केटिंग करे अरे भाई बेब साइड बनवाना हो तो आलोक जी से ही बनवाना उनका हेल्पिंग नेचर तुम्हें अपने बेब साइड को चलाने और उसे समझने में पूरी मदद करेगा सेवा दो सम्मान मिलगा यही जगपाल जी का कहना है

[जन कवि]गोपाल जी सोलंकी

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  1. You are absolutely right.. Vaise bhi apane yaha website banane ke naam par bevkoof banane ka kaam jyada hota hai. anap shanap paise maangte hai log web site banane ke liye aur service ke naam par kuchh nahi dete. Maine bhi usi mahoday se apan website banvai hai jinhone aapki web site banai hai. mai apani website aviralsamachar.com se puri taah se Sntusht hu. ye badi vidambana hai sasta kaam karne wale quality nahi de sakte aur jo quality ki baat karte hai woh isaki itni kimat mangte hai ki use hum afford nahi kar sakte. lekin “piyush bhai” ke paas ye dono chij maujud hai yane kaam bhi cheap rate me aur quality lajawab. mai to baki logo se bhi kahna chahunga ki saste ke chakkar me na pade quality ka bhi khayal rakhe.. aur yadi ye dono chije chahte hai to jisane hamari web site banai hai ek baar unase jaroor sampark kare|

    Muje Piyush bhai ne kahai ki aaj meri ek aur web site launch ho gai check kar ke batana. jab is site par aaya to site dekh kar dang rah gaya aur comments likhne ke liye vivash ho gaya. Very Nice web site .Congratulation Solanki ji and Piyush Bhai. aapki website lokpriya bane aisi shubhkaamnao ke saath

    Manish Vora
    http//www.aviralsamachar.com