आदि कवि .ऋषि वाल्मीकि [jynti]

  1. valmiki rishi . aadi kavi rishi vlmiki jaynti
  2. ram lakshamn .aadi kavi rishi valmiki jaynti
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ram lakshman . aadi kavi rishi valmiki jaynti
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आदि कवि .ऋषि वाल्मीकि
संस्कारों की जड़, बड़ी गहरी होय
संगत के असर की ,उम्र थोड़ी होय
रत्नाकर
डाका जनी कर,पेट की आग बुझाय
बचकर उनसे, राहगीर, जा ना पाय
नारद
सोए संस्कार जगाने, किया उपाय
दिया मन्त्र राम नाम की,लौ लगाय
वाल्मिक
जपते जपते रम गए, राम के माय
देखा तड़पत जीव,करुणा भर आय
रामायण
कहलाए आदि कवि ,रामायण लाय
सीता को आश्रय दिया,कुटीया छाय
लव कुश
आश्रम में पलकर बढ़े ,शिक्षा पाय
अश्व मेघ के घोड़े को लिया रुकाय
लव कुश अयोध्या गमन
वाल्मीकि ने सब को,दिया मिलाय
सीता भूमिगत, बच्चे राम ने पाय
जयंती
हिन्दू जनता श्रद्धा से, शीश झुकाय
भारत में हम गर्व से,जयंती मनाय

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. आदि कवि .ऋषि वाल्मीकि
    संस्कारों की जड़, बड़ी गहरी होय
    संगत के असर की ,उम्र थोड़ी होय
    रत्नाकर
    डाका जनी कर,पेट की आग बुझाय
    बचकर उनसे, राहगीर, जा ना पाय
    नारद
    सोए संस्कार जगाने, किया उपाय
    दिया मन्त्र राम नाम की,लौ लगाय
    वाल्मिक
    जपते जपते रम गए, राम के माय
    देखा तड़पत जीव,करुणा भर आय
    रामायण
    ramayn ki rchna kar aap amr pad pae
    hid ki sari janta aapki jynti khushi se mnae
    jan kvi gopal ji solanki