इंसान कहां है

  1. gopal ji solanki.ensana khan hai
  2. mhadev .ensana kahan hai
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gopal ji solanki.ensana khan hai

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mhadev .ensana kahan hai

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माटी के पुतले है
पत्थर के दिल
आज की इस दुनिया में
इंसान कहां है
कांक्रीट ही कांक्रीट है
हरियाली कहां है
बड़ नीम पीपल की
छाँव कहां है
सिमट रहे गाँव और
फैले है शहर
कोयल चिड़िया तोता की
ठांव कहां है
छोटे छोटे प्लाटों में
छोटे छोटे घर है
पूछ रही गौ माता मेरा
ठांव कहां है
अब तो लोग रहते है
बड़े शहर में
पेड़ गाय कुत्ता का
निभाव कहां है
कैसी ये उन्नति है
कैसा है विकास
बढ़ रहे शहर नए
वो गाँव कहां है
जहरीले धुंवे से
घुटती है सांस
प्यासी है धरती माँ
कुए ताल कहां है
खेतो में घर और
उद्योग उग रहे
धान के कटोरे का
धान कहां है
लालच शिखर में है
दानव मन मांय
घायल रिश्ते है सभी
इंसान कहां है
त्याग निष्ठां इमां सब
खो गए यहाँ
मन्दिरों में भी तम है r-daanva,r-bhgvana

भगवान कहां है

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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One Comment

  1. माटी के पुतले में पत्थर का दिल है ,आज का ये मानव इतना संग दिल है ,गाँव खेत जंगल सब कहीं खो गए अब हम शहर के हो गए,दिखती नहीं हरियाली कहीं भी जो की खुद की साँसों के लिए है जरूरी स्वार्थ में इतने अंधे हो गए,पशु पक्षियों का बसेरा हमने छीना ,मार मार थाली को अपनी सजाया पेट को उनका कब्रिस्तान बनाया ,स्वार्थ में रिश्ते से गौण हो गए नकली दवा केमिकल युक्त अनाज सब्जी फल घर में प्रयुक्त हो रहे हवा में जहरीला धुंवा हर और कांक्रीट दिखे वर्षा जल कहां टिके ,क्या देकर जा रहे है हम भविष्य की पीढ़ी को सोचो ???????????
    जन कवि.गोपाल जी सोलंकी