उन्नति में दूर दर्शिता का कमाल

कपिल और राहुल ने कोलेज करने के बाद एक ही कम्पनी एक साथ ज्वाइन की, दोनों काफी मिलन सार और मेहनती थे, और अपना काम इमानदारी से करते थे, कुछ दिन के बाद कपिल की तरक्की सेल्स मैनेजर के पद पर हो गई, उसकी पगार और रुतबा बढ़ बढ़ गया, जबकि राहुल अभी भी उसी पद पर बना हुआ था, इससे उसके मन में असंतोष पनपने लगा और एक दिन वह अपना स्तीफा लेकर बॉस के पास पहुंच गया, बॉस सब समझ गए वे यह जानते थे, की राहुल भी अपना काम मेहनत और इमानदारी से करता है, इसलिए वे ऐसे कर्मचारी को छोड़ना नहीं चाहते थे, पर राहुल के मन से यह भावना हटाना भी जरूरी था की उसके साथ भेद भाव हुआ है, इस लिए उन्होंने एक तरकीब निकाली और राहुल से कहा की बाजार जा कर पता करो की बाजार में तरबूज बिकने आया है या नहीं राहुल बाजार जा कर पता लगाकर आया, और बोला हाँ तरबूज बाजार में बिक रहा है, बॉस ने कहा उसका भाव पता कर के आओ कितने में मिल रहा है राहुल फिर बाजार गया और भाव पूछ कर आया और बॉस को बता दिया की तरबूज की कीमत बीस रूपये है, फिर बॉस ने उसके सामने कपिल को बुलवाया और कहा जरा पता लगाकर आओ की बाजार में तरबूज आ गया है की नहीं कपिल ने कहा जी सर अभी पता करके आता हूँ और वह उन्हें नमस्ते करके चला गया और थोड़ी देर बाद आया आकर उसने बताया हाँ बॉस बाजार में तरबूज आ गया है और अपने आफिस के पास एक ठेले में तरबूज बिक रहे है वह एक तरबूज का दाम बीस रूपये बता रहा है पर अगर हम कुछ ज्यादा लेते है तो वह उसमे और रियायत देने को तत्पर है और मैं आप के लिए एक तरबूज लाया हूँ आप इसका रसास्वादन करे और उसने अपने लाए हुए तरबूज को जिसे की चपरासी द्वारा काट कर नमक काली मिर्च लगा कर प्लेट में सजा दिया गया था उन्हें भेंट की राहुल यह सब देख रहा था और अपने मन में अपनी कमजोरी भी समझ रहा था उसने बॉस से क्षमा मांगते हुए कहा सौरी सर मेरी भूल क्षमा करने की कृपा करे मैं समझ गया की मेहनत इमानदारी के साथ समझ बुझ भी उतनी ही जरूरी है अब मैं और भी सजगता से काम करूंगा और मुझे उम्मीद है की मेरी तरक्की भी होगी बॉस ने मुस्कुराते हुए कमल का कंधा थपथपा दिया और कहा मुझे यकीन है तुम में वह काबिललियत है और तुम इसे जल्द ही साबित करके तरक्की हाशिल कर लोगे और उन्होंने उसका स्तीफा वहीं फाड़ कर फेंक दिया अब राहुल को बॉस से या राम से कोई सिकायत नहीं थी ना मन में कोई मलाल था वह दुने उत्साह से अपने काम में जुट गया इस तरह एक दूरदर्सी सोच ने एक काबिल कर्म चारी का भविष्य बर्बाद होने से बचा लिया शायद इसी लिए वे बॉस के पद पर आरूढ़ थे|
जन कवि लेखक .गोपाल जी सोलंकी

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