ऐसी है मुस्कान तुम्हारी

  1. a.p.solanki .aisi hai muskan tumhari
  2. g.g.solanki .aisi hai muskan tumhari
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ऐसी है मुस्कान तुम्हारी
ओ मेरी मन मीत
ऐसी है मुस्कान तुम्हारी ,ओ मेरी मन मीत
पल में कर लेती अपना ,लेती है दिल जीत
ऐसी है
बड़ी बड़ी आँखों में नेह की ,नदिया बहती है
दिल को ठंडक पहुचे, ऐसी शीतलता रहती है
एक नजर में ही लेती , सब का दिल जीत
ऐसी है
वाणी ऐसी जैसे शहद ,की मिठास घुल जाए
मन में कितना भी कडुआ ,पन हो धुल जाए
मिश्री में मिलाकर पेश , किया जैसे नवनीत
ऐसी है
मन है जैसे निर्झर झरना ,सुद्ध और निर्मल

सहज ही मिल जाता हर ,मुश्किल का हल

निश्छल उदार माँ की ममता ,सी हो पुनीत
ऐसी है
तन मन दोनों ही सुंदर, ओ मेरे मन मीत
धड़क रही मेरे सीने में ,ज्यो जीवन संगीत
गोपाल जी ने तुमसे ही , सीखी है ये प्रीत
ऐसी है
जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. ऐसी है मुस्कान तुम्हारी
    ओ मेरी मन मीत
    ऐसी है मुस्कान तुम्हारी ,ओ मेरी मन मीत
    पल में कर लेती अपना ,लेती है दिल जीत
    ऐसी है
    बड़ी बड़ी आँखों में नेह की ,नदिया बहती है
    दिल को ठंडक पहुचे, ऐसी शीतलता रहती है
    एक नजर में ही लेती , सब का दिल जीत
    ऐसी है
    aisi hai muskan tumhari
    jan kavi .gopal ji solanki