ओ री बरखा ओ री बदली ✍

  1. barso megha . oree barkha .o ree badli
  2. o ree badli . o ree barkha .o ree badli
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ओ री बरखा ✍
ओ री बरखा ओ री बदरी
झूम के आज ऐसे बरसो
जा ना सके साजन घर से
ऐसा झमा झम तुम कर दो
ओ री बरखा
प्यार की ऐसी वर्षा करदो
तन मन मे सिहरन भर दो
हो रोमांचित भरले बाहों मे
मौसम आज ऐसा करदो
ओ री बरखा
नीरस ये दिन चर्या रोज की
कसरत ये अर्थ उपार्जन की
रंग प्यार का फिर गहराए
माहौल आज वो फिर करदो
ओ री बरखा
कितने ही सावन तरसी हूं
औ विरहा की पीर सही हूं
आज प्यार मे तृप्ती पाउं
उर मे ऐसा आनंद भर दो
ओ री बरखा
खो जाएं एक दूजे मे हम
हो जाएं एक दूजे के हम
वरुण देव हो प्रसन्न आप
आज हमें ऐसा वर दो
ओ री बरखा

जन कवि. गोपाल जी सोलंकी

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  1. ओ री बरखा ओ री बदली ✍
    ओ री बरखा ओ री बदरी
    झूम के आज ऐसे बरसो
    जा ना सके साजन घर से
    ऐसा झमा झम तुम कर दो
    ओ री बरखा
    प्यार की ऐसी वर्षा करदो
    तन मन मे सिहरन भर दो
    हो रोमांचित भरले बाहों मे
    मौसम आज ऐसा करदो
    ओ री बरखा
    o ree barkha .o ree badli
    jan kavi gopal ji solanki