कैसा ये बसंत का मौसम

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  2. madk basnt . kaisa ye basnt ka mousam
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कैसा ये बसंत का मौसम
कभी चले बसंती बयार
कभी सिहराती हल्की ठंड
कभी गुनगुनी सुनहरी धूप
मादकता लिए हुए मौसम
निगाहों में प्यार
बाहों में भर लेने का आग्रह
अंक में समा जाने की चाह
फिर तेज होने लगी धूप
मांदर की थाप होली के गीत
खेलने लगे ठाकुर जी
मन्दिरों में रंग और गुलाल
आज अचानक छाए बादल
जाने कहां से आए बादल
उमड़ घुमड़ कर झूम झूम
कर बरसे बादल
ठिठुरन का एहसास कराया
जाता जाड़ा लौट के आया
जाने कितने रंग दिखाएगा
जाते जाते ये बसंत
कैसा ये बसंत का मौसम

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

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  1. kaisa ye basnt ka mosam
    मांदर की थाप होली के गीत
    खेलने लगे ठाकुर जी
    मन्दिरों में रंग और गुलाल
    आज अचानक छाए बादल
    जाने कहां से आए बादल
    उमड़ घुमड़ कर झूम झूम
    कर बरसे बादल
    ठिठुरन का एहसास कराया
    जाता जाड़ा लौट के आया
    जाने कितने रंग दिखाएगा
    जाते जाते ये बसंत
    कैसा ये बसंत का मौसम
    जन कवि गोपाल जी सोलंकी
    kaisa ye basnt ka mousam
    jan kavi gopal ji solanki