क्यों बरसूँ मैं तेरे शहर में

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क्यों बरसूँ मैं तेरे शहर में

क्यों बरसूँ मैं तेरे शहर में , वजह बतानी होगी

पर्यावरण में योग दान की ,जगह दिखानी होगी

क्यों बरसूँ

सदियों से तुम इस धरती का ,शोषण करते आए

जैसी थी ये हरी भरी वैसी ही ,फिर बनानी होगी

क्यों बरसूँ

सर्दी गर्मी वर्षा का असंतुलन ,अनदेखी करते रहे

चिंता है इस असंतुलन की ,तुमको जतानी होगी

क्यों बरसूँ

वन लगाना रक्षा करना मानव ,भूल चूका कबसे

उसे अपनी जीवन रक्षा हित,मुहीम चलानी होगी

क्यों बरसूँ

लुप्त हो चुकी पशु पक्षियों की,कई प्रजाती आज

बचे हुओं को बचाने अब,अभियान चलानी होगी

क्यों बरसूँ

आज प्रदूषित धरती पर वायु ,जल आन्न फल

केमिकल से जान माल की ,क्षति बचानी होगी

क्यों बरसूँ

कांक्रीटीकरण घटता जल स्तर ,पीने का पानी

वर्षा जल संरक्षण की तेज,मुहीम चलानी होगी

क्यों बरसूँ

वाहनों का धुंआ बढ़ता और ,जहरीली होती हवा

भावी पीढ़ी की साँसे बचाने,हरियाली लानी होगी

क्यों बरसूँ

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी         

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One Comment

  1. क्यों बरसूँ मैं तेरे शहर में

    क्यों बरसूँ मैं तेरे शहर में , वजह बतानी होगी

    पर्यावरण में योग दान की ,जगह दिखानी होगी

    क्यों बरसूँ

    सदियों से तुम इस धरती का ,शोषण करते आए

    जैसी थी ये हरी भरी वैसी ही ,फिर बनानी होगी

    क्यों बरसूँ

    सर्दी गर्मी वर्षा का असंतुलन ,अनदेखी करते रहे

    चिंता है इस असंतुलन की ,तुमको जतानी होगी

    क्यों बरसूँ
    kyon barsun main tere shahar me
    jan kavi .gopal ji solanki