गुल्लक के पैसे ✍

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गुल्लक के पैसे ✍
आज लिया जो उसने
वो अनमोल था
गुल्लक से निकाले पैसे
खुश होके चला घर से
अपने लिए खरीदेगा कुछ
अपने जमा किए जर से
परकर ना सका ऐसा
सोचा था उसने जैसा
घायल था एक सड़क पर
तड़प रहा जमीं पर
सब आ रहे जा रहे
बेपरवाह से बाजू से
संवेदन हीन इस घटना को
देखा जो उसने दौड़ा
एक आटो मे उसको डाला
हास्पीटल मे डाक्टर ने दवा का
पर्चा थमा डाला
लाया दवा वो दौड़ कर देर ना
हो जाए
जैसे भी हो उस शख्स की जान
बच जाए
मेहनत रंग लाइ
डाक्टर ने पीठ ठोकी समय पर
मदद पाने से बच गया ये भाई
तुम कौन हो इसके कोई और
नहीं आया

उसने कहा सड़क से उठा के मैं
लाया
अंजान हूं मैं इनसे पर रिस्ता
एक जाना
इंसानियत थी मुझमे मेरा फर्ज था
इसे बचाना
तब तलक उसे ढूंढते सब उसके
परिजन आ गए
देखा उसे सुरक्षित आंखो मे आंसू
आ गए
तुम बन के फरिस्ते गर इसको ना
बचाते
एक परिवार
पत्नी दो बच्चे अनाथ हो जाते
पा कर दुआएं सब की
घर को वो चल दिया
आज जो उसने अपने लिए खरीदा
वो अनमोल था
खुश था वो बड़ा मन मे
आज उसकी गुल्लक एक जान बचाने
के काम आ गई
लाया जो अपने लिए वो
अनमोल था

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. gullak ke paise
    bade utsah se usne apni gullak todi or apne jama kie paiso se apne lie kuchh khridne ghr se nikla .rah me ek ghayal ko sadk par yadapte dekhkar usse raha nhi gya or vo use haspital le gaya vahan uske ilaj ke lie usne apne sare paise khrch kar die bad me uske ghar vale use dhundhte hue aae or use surakshit dekh kar uska bahut dhnyavad kie aj jo usne apne lie khrida tha vo anmol tha
    jan kavi gopal ji solanki