जब वस्त्र नहीं थे

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जब वस्त्र नहीं थे
जब वस्त्र नहीं थे
आचरण गंदे नहीं थे
माँ बहन बेटी तब भी थी
रिस्तो में दोष नहीं थे
जब वस्त्र नहीं थे
आज भी आदि वासी
बस्तियों में
लोग निर्वस्त्र रहते है
हम भी कभी वही थे
जब वस्त्र नहीं थे
पशु पक्षी आज भी उसी
परम्परा को निभा रहे
वंस भी चला रहे
हम भी उन जैसे ही थे
जब वस्त्र नहीं थे
हर ओर खुला पन था
अमर्यादित नहीं थे
रहते थे हिल मिल कर
परिवार समाज सब थे
जब वस्त्र नहीं थे

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. जब वस्त्र नहीं थे
    आचरण गंदे नहीं थे
    माँ बहन बेटी तब भी थी
    रिस्तो में दोष नहीं थे
    जब वस्त्र नहीं थे
    आज भी आदि वासी
    बस्तियों में
    लोग निर्वस्त्र रहते है
    हम भी कभी वही थे
    jab vastra nahi the
    jan kavi gopal ji solanki