जिन्हें पाके कभी झूमे थे

  1. mere apne . jinhe pake kabhi ham jhume the
  2. bal gopal . jinhe pake kabhi ham jhume the
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जिन्हें पाके कभी झूमे थे,सीने से लगा कर चूमे थे
प्यार की वो सौगात थे तुम, आज मेरी बाहों में थे
क्यों बदल जाते हैं
क्यों बदल जाते है वो , जो हमारे अपने होते है
क्यों जख्म अपने ही देते,आहत उन्हीं से होते है
क्यों बदल जाते है
कली से भी कोमल, जिनके बदन थे, कभी रुई से
वही जिगर के टुकड़े,चुभ जाते दिल में,शूल बन के
उन आंखो में,जो उन्हीं के सपनों को,जी रहे होते है
क्यों बदल जाते है
बाहों में झूलाते हुए, नहीं लगा कभी, ये दगा देगा
छाती से लगाते हुए, नही लगा कभी, जखम देगा
माता पिता भी कितने,बेवकूफ,और पागल होते है
क्यों बदल जाते है
जब पैदा होते,हर्ष व उल्लास, दिल में समाता नहीं
उनकी परवरिस में,कौन सा साधन,जो जुटता नही
उनको खुश करने, उनके संग,बच्चे कभी वे होते है
क्यों बदल जाते है
माता पिता परिवार, बच्चे दादा दादी, घर बार सब
क्या एक झूठा, समझौता, होता है ये ,ऐतबार सब
आज उन्ही से, दिल में जख्म लिए,छुप के रोते है
क्यों बदल जाते है
आज की दुनिया, इतनी असंवेदन शील,नकली क्यों
मतलब निकलो, और भूल जाओ,इतनी स्वार्थी क्यों
उसीके लिए दुआ मांगते, जिनसे प्रताड़ित में होते है
क्यों बदल जाते है

[जन कवि] गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. जिन्हें पाके कभी झूमे थे,सीने से लगा कर चूमे थे
    प्यार की वो सौगात थे तुम, आज मेरी बाहों में थे
    क्यों बदल जाते हैं
    क्यों बदल जाते है वो , जो हमारे अपने होते है
    क्यों जख्म अपने ही देते,आहत उन्हीं से होते है
    क्यों बदल जाते है
    कली से भी कोमल, जिनके बदन थे, कभी रुई से
    वही जिगर के टुकड़े,चुभ जाते दिल में,शूल बन के
    उन आंखो में,जो उन्हीं के सपनों को,जी रहे होते है
    क्यों बदल जाते है
    jinhe pake kabhi ham jhume the
    jan kavi. gopal ji solanki