जीवन का सार

  1. khiladi n. 1. jeevan ka sar
  2. saniya nehwal . jeevan ka sar
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जीवन का सार
खिलाड़ी बदलते रहते हैं
खेल वही होता है
खेल बदलते रहते है
मैदान वही होता है
आना जाना जीव करे
संसार वही होता है
रंग मंच के पात्र यहाँ सब
सूत्र धार वही होता है
ना कुछ लाना ना ले जाना
यहाँ का यहीं होता है
लेना देना खोना पाना रिश्तों
का आधार वही होता है
सूक्ष्म से वृहद से सूक्ष्म जीव
का आकार वही होता है 
मिलना बिछड़ना और मिलना
जीवन का सार वही होता है

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. jeevan ka sar
    khiladi badlte rahte hai
    khel vahi hota hai
    khel badlte rahte hai
    maidan vahi hota hai
    rng manch ke patr bdlte rahte hai
    sutr dhar vahi hota hai
    sukshm se vrihad se sukshm
    jeevan ka sar vaho hota hai
    jan kavi .gopal ji solanki