दिहाड़ी मजदूर

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दिहाड़ी मजदूर
वे रोज घर से निकलते है
कमाने के लिए
पेट की भूख मिटाने जरूरी है
कमाना
दिन भर काम शाम को दाम
याने मजदूरी
शहर में उनके लिए एक
स्थान नियत है
लोग आते है मोल भाव
करते
और अपनी जरूरत के
हिसाब से
जितने मजदूर स्त्री पुरुष
ले जाते हैं
रेती ,गिट्टी ,इंटा उठाना
सीमेंट की बोरी उठाना
मसाला बनाना
और उसे गन्तव्य तक
पहुंचाना
जमीन से लेकर दस बीस
मंजिल तक
दिन भर की कड़ी मेहनत
घर का राशन
सारे दुःख दर्द को भुलाने
थोड़ी शराब खोरी कर मस्त
हो जाते हैं
सरकारी जमीन पर अवैध
झोपड़ी सुलभ सौचालय
सरकारी जल सुविधा
सस्ते राशन के लिए राशन
कार्ड स्मार्ट कार्ड इलाज के
लिए सभी कुछ सरकारी फिर
भी वह गरीब है
सरकार का सबसे सुलभ वोटर
धरना रैली जुलूस सब को
सस्ते में उपलब्ध
थोड़ी सी मजदूरी पर क्योकि
ये मजदूर है

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. dihadi majdur
    दिन भर की कड़ी मेहनत
    घर का राशन
    सारे दुःख दर्द को भुलाने
    थोड़ी शराब खोरी कर मस्त
    हो जाते हैं
    सरकारी जमीन पर अवैध
    झोपड़ी सुलभ सौचालय
    सरकारी जल सुविधा
    सस्ते राशन के लिए राशन
    कार्ड स्मार्ट कार्ड इलाज के
    लिए सभी कुछ सरकारी फिर
    भी वह गरीब है
    सरकार का सबसे सुलभ वोटर
    धरना रैली जुलूस सब को
    सस्ते में उपलब्ध
    थोड़ी सी मजदूरी पर
    dihadi majdur
    jan kavi .gopal ji solanki