नव जात का त्याग ✍

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ये नव जात ✍
बेदर्दी से फेक दिया
कूड़े मे नव जात क़ो
खुद का पाप सजा
दी उस नव जात को
अपराध बोध ने फिकवाया
उसे आधी रात को
उस मासूम का रोदन
ना जगा सका जजबात को
फेक दिया कूड़े मे उसे
अपनोंने आधी रात को
बेदर्दी से
नोच रहे थे कुत्ते उस
माँ के सीने की
हकदार को
शर्म शार मानवता
रिस्तों के बेरहम हार
को
प्यार या पाप ऐसा
दुष्परिणाम
झकझोर देता है
संवेदन शील
इनसान को
आखिर गलत निर्णय
ले जाता पतन
की राह को

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. नव जात का त्याग
    क्यों फेक दिया जाता है उसे जिसे इतने कष्ट सहकर अपने कोख में पाला था
    ऐसी क्या मजबूरी है |वो मजबूरी है अवैध सम्बन्ध ,बलात्कार ,बहला फुसला कर बनाए गए सम्बन्ध ,नाबालिग गर्भाधान ,इस सबके लिछे है अपराध बोध ,जो एक नव जात पर ये
    अत्याचार के लिए मजबूर करता है जिससे बहुत सी जाने अकाल मौत मरती है जानवर उन्हें
    नोच खाते है अंग भंग कर देते है इसके लिए जागरूकता की जरुरत है
    जन कवी .गोपाल जी सोलंकी