पिया भए सौतन के

  1. devayani .piya bhae soutan ke
  2. sng soutan ke .piya bhae soutan ke
  1. devayani .piya bhae soutan ke
  2. sng soutan ke .piya bhae soutan ke
devayani .piya bhae soutan ke

Devayani . piya bhae soutan ke
kavyapravah.com

sng soutan ke .piya bhae soutan ke

sng soutan ke . piya bhae soutan ke
kavyapravah.com

 

पिया भए सौतन के
घन गरजे बिजुरी चमके
संग पिया सौतन के
घन गरजे बिजुरी चमके
संग पिया सौतन के
घन गरजे
गरज गरज कर घन डरपावे
चमक चमक कर बिजुरी डरावे
आग लगे सौतन के
घन गरजे
तन मन सब अर्पण है जिनको
नाही परवा हमरी उनको
पग पूजे सौतन के
घन गरजे
नाज रूप का शिक्षा का मद
का करें इस यौवन का अब
हार गया सौतन से
घन गरजे
कुल की मर्यादा से डरे हम
सोने के पिंजरे में जरें हम
डाह भरे सौतने के
घन गरजे
बन ठन कर नित घर से जावे
इत्र लगा कर हमें खिजावे
जावे घर सौतन के
घन गरजे
साठ बरस के गाँठ के पूरे
छोड़ के सारे सपने अधूरे
पिया भए सौतन के
घन गरजे
नारी ने नारी को लूटा
बसा बसाया एक घर टूटा
हासिल क्या सौतन के
घन गरजे

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. पिया भए सौतन के
    घन गरजे बिजुरी चमके
    संग पिया सौतन के
    घन गरजे बिजुरी चमके
    संग पिया सौतन के
    घन गरजे
    गरज गरज कर घन डरपावे
    चमक चमक कर बिजुरी डरावे
    आग लगे सौतन के
    घन गरजे
    piya bhae soutan ke
    jan kavi .gopal ji solanki