प्रेम पुराण ✍

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  2. virha ki mar . prem puran
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प्रेम पुराण ✍
प्रेम गली अति संकरी जी
दूजा नाही समाय
प्रेम छुपाए ना छुपे जी
स्वयंम प्रकट हो जाय
प्रेम मे वो दिवानगी जी
प्रेमी पगला हो जाय
प्रेम मे विरहा की अगन जी
तन मन दोनो जलाय
प्रेम मे धोखा हो अगर जी
कवि शायर बन जाय
प्रेम मे जो इजहार से डरे जी
प्रेमिका की डोली उठाय

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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  1. प्रेम पुराण ✍
    प्रेम गली अति संकरी जी
    दूजा नाही समाय
    प्रेम छुपाए ना छुपे जी
    स्वयंम प्रकट हो जाय
    प्रेम मे वो दिवानगी जी
    प्रेमी पगला हो जाय
    prem puran
    jan kavi gopal ji solanki