बरखा का ले संदेशा

  1. barish ki chhutti .barkha ka le sandesh
  2. faimili masti . barkha ka le sandesh
  1. barish ki chhutti .barkha ka le sandesh
  2. faimili masti . barkha ka le sandesh
barish ki chhutti .barkha ka le sandesh

barish ki chhutti . baris ka le sandesha
kavyapravah.com

faimili masti . barkha ka le sandesh

faimili masti . barkha ka le sandesh
kavyapravah.com

 

बरखा का ले संदेशा
बरखा का ,ले संदेशा ,बादल ,डोलने लगे
चूजों की चिंता, पक्षी पर को, तोलने लगे
चलने लगी है तेज हवा गर्म थपेड़े
हर कोई ,अपने, घर की तरफ, दौड़ने लगे
बरखा का ले
सूरज की ,तपन ,गर्मी से ,बेहाल, सब लगे
कूलर कौन, बात, एसी भी , फेल होने लगे
पशु पक्षियों के हाल से बेपरवाह आदमी
कुल्लू मनाली,शिमला,की तरफ ,दौड़ने लगे
बरखा का ले
सूरज को, काले बादलों , ने घेर लिया है
और तेज ,हवाओं को,उसने, बंदी किया है
तड़ तड़ की तेज आवाज से पड़ने लगी बुँदे
वर्षा से ,बचने ,सड़को पे, लोग, दौड़ने लगे
बरखा का ले
बरसात ने,पल में,थल को,जल ही जल किया
प्यासी धरती, ने भी ,जी भर, के जल पिया
मिटटी की खुशबु से हवा महकने लगी है
बच्चे भी ,नावें, कागजो की, छोड़ने लगे
बरखा के ले
भीगी पसीने ,से वो ,उखड़ी हुई, थी रहती
गर्मी के ,बहाने से , दूर, हमसे थी ,रहती
बिजली के कडकने से वो आके है चिपकी
अब प्यार के, घोड़े भी ,दिल में ,दौड़ने लगे
बरखा के ले

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. barkha ka le sandesh
    बरसात ने,पल में,थल को,जल ही जल किया
    प्यासी धरती, ने भी ,जी भर, के जल पिया
    मिटटी की खुशबु से हवा महकने लगी है
    बच्चे भी ,नावें, कागजो की, छोड़ने लगे
    बरखा के ले
    भीगी पसीने ,से वो ,उखड़ी हुई, थी रहती
    गर्मी के ,बहाने से , दूर, हमसे थी ,रहती
    बिजली के कडकने से वो आके है चिपकी
    अब प्यार के, घोड़े भी ,दिल में ,दौड़ने लगे
    बरखा के ले
    barkha ka le sandesh
    jan kavi . gopal ji solanki