बेबी डे केयर बुक

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बेबी डे केयर बुक
गूंज रही है डे केयर में ,नन्हे मुन्नों की किलकारी
शीलू ने सजाई अपने , आंगन में ये फुलवारी
गूंज रही
अर्थ तन्त्र के इस युग में , जौब जरूरी है सबकी
नन्हे शिशु की चिंता में , जान पालकों की अटकी
छोड़ना होगा डे केयर में , सर्विस की है लाचारी
गूंज रही
छिन्न भिन्न परिवार हुए ,बिछड़े ताया चाचा दादा
दादी का वो लाड़ प्यार , शहर नौकरी ले भागा
आज परवरिस पे पड़ गई, नौकरी दोनों की भारी
गूंज रही
भारी मन से ले नन्हे को , डे केयर की ओर चले
कैसे रहेगा नन्हा उन बिन , पल पल ये है मचले
देख व्यवस्था और संसाधन ,मिट गई चिंता सारी
गूंज रही
बड़ी व्यवस्थित दिन चर्या ,सुघड़ है केयर टेकर भी
झूले खिलौने पलंग है एसी , दूध नास्ता वेफर भी
आंचल सब पर ममता का , हर नन्हे पर वो वारी
गूंज रही
रियल स्टार्ट अप इसमें ,पुस्तक पढ़ कर देखो जरा
अपने स्वर्णिम अनुभव का ,सोना उसने इसमें धरा
कोशिश होगी मन से उस ,आंगन होगी ये फुलवारी
गूंज रही

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. de keyar book
    भारी मन से ले नन्हे को , डे केयर की ओर चले
    कैसे रहेगा नन्हा उन बिन , पल पल ये है मचले
    देख व्यवस्था और संसाधन ,मिट गई चिंता सारी
    गूंज रही
    बड़ी व्यवस्थित दिन चर्या ,सुघड़ है केयर टेकर भी
    झूले खिलौने पलंग है एसी , दूध नास्ता वेफर भी
    आंचल सब पर ममता का , हर नन्हे पर वो वारी
    गूंज रही
    रियल स्टार्ट अप इसमें ,पुस्तक पढ़ कर देखो जरा
    अपने स्वर्णिम अनुभव का ,सोना उसने इसमें धरा
    कोशिश होगी मन से उस ,आंगन होगी ये फुलवारी
    जन कवि .गोपाल जी सोलंकी