भाभी माँ [परलोक गमन] 8 .9 . 2016 DIN GURUVAR

  1. BHABHI MA ,BHABHI MA PARLOK GAMN
  2. GOPAL JI ANNPURNA SOLANKI .BHABHI MA PARLOK GAMN
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भाभी माँ

मात्री तुल्य वह नेह की छाया खो गई
तोड़ के जग से रिश्ता चैन से सो गई
मात्री तुल्य
उस आंचल की छाया में अपनापन था
ममता और दुलार भरा वो आंगन था
हे परमेश्वर हम से खता क्या हो गई
मात्री तुल्य
भाभी थी पर माँ सा हमको प्यार दिया
बच्चों से भी बढ़कर हमको दुलार दिया
अपना हर एक फर्ज निभा कर सो गई
मात्री तुल्य
जो भी मिलता पल में अपना हो जाता
भर कर खुशियाँ अपने मन में वो लाता
लुटा के ममता सब पर अपनी सो गई
मात्री तुल्य
अपने निश्छल प्यार से सबको बाँधा था
फिर चुपके से बिस्तर अपना बाँधा था
रोता बिलखता छोड़ कहां वो हो गई
मात्री तुल्य
प्यार ममता दुलार का ऐसा झरना थी
जहां से सिर्फ नेह सभी पर बरसती थी
अपनी छवि मन सबके बसा कर सो गई
मात्री तुल्य
अश्रु पूर्ण श्रद्धांजली

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. भाभी माँ

    मात्री तुल्य वह नेह की छाया खो गई
    तोड़ के जग से रिश्ता चैन से सो गई
    मात्री तुल्य
    उस आंचल की छाया में अपनापन था
    ममता और दुलार भरा वो आंगन था
    हे परमेश्वर हम से खता क्या हो गई
    मात्री तुल्य
    भाभी थी पर माँ सा हमको प्यार दिया
    बच्चों से भी बढ़कर हमको दुलार दिया
    अपना हर एक फर्ज निभा कर सो गई
    मात्री तुल्य
    जो भी मिलता पल में अपना हो जाता
    भर कर खुशियाँ अपने मन में वो लाता
    लुटा के ममता सब पर अपनी सो गई
    मात्री तुल्य
    जन कवि .गोपाल जी सोलंकी