माँ का स्वागत [शारदीय नव रात्रि]

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माँ का स्वागत [शारदीय नव रात्रि]

माँ के स्वागत में हमने ,कुटिया सजाई है
नवरात्रि पर माँ बेटों से मिलने आई है
माँ के
जिसके चरणों में सुख समृद्धि रहती है
जिसके लिए भक्ति की गंगा बहती है
वो हम पर कृपा बरसाने आई है
माँ के
मोह शोक से ग्रस्त मैया बेटे तुम्हारे है
तुमने तो मैया कितने पापी को तारे है
आज फिर दर पर तेरे भीड़ उमड़ आई है
माँ के
तेरे दरबार में माँ खुशियों का डेरा है
चरणों में तेरे मैया सर झुका मेरा है
भर सब की झोली मैंने टेर ये लगाई है
माँ के
आज माँ हम पर फिर कृपा करने आई है
माँ की ये महिमा गोपाल जी ने गाई है
जब भी पुकारा आई देर ना लगाई है
माँ के

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. माँ का स्वागत [शारदीय नव रात्रि]

    माँ के स्वागत में हमने ,कुटिया सजाई है
    नवरात्रि पर माँ बेटों से मिलने आई है
    माँ के
    जिसके चरणों में सुख समृद्धि रहती है
    जिसके लिए भक्ति की गंगा बहती है
    वो हम पर कृपा बरसाने आई है
    माँ के
    मोह शोक से ग्रस्त मैया बेटे तुम्हारे है
    तुमने तो मैया कितने पापी को तारे है
    आज फिर दर पर तेरे भीड़ उमड़ आई है
    ma ka svagat
    jan kvi gopal ji solanki