माँ, नहीं नौकरानी चाहिए

  1. budhe mata pita ,ma nahi noukrani chahie
  2. old ej kapl .ma nahi noukrani chahie
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old ej kapl .ma nahi noukrani chahie

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माँ नहीं नौकरानी चाहिए
सुबह सुबह पुत्र का फोन ,आज इतने दिनों के बाद
हलो …….
पिता जी चरण स्पर्स ,आप लोग कैसे हैं
हम ठीक हैं
वहां सब कैसे हैं बहु बच्चे ,सब ठीक है पिताजी
कैसे फोन किया बेटा
पिता जी आप से एक रिक्वेस्ट है ,माँ को यहाँ भेज दीजिए
क्यों बेटा
पिताजी आप तो जानते हैं हम दोनों सर्विस करते हैं
सुबह सुबह दोनों को तैयार होकर ऑफिस जाना होता है
फिर बच्चो को स्कुल के लिए तैयार करना
सब के लिए नास्ता टिफिन तैयार करना
स्कूल से आने के बाद
ऑफिस में हमारे आने तक बच्चों का अकेले घर रहना
मन में अनेक शंकाएँ होती है ,बड़ी तकलीफ है
प्लीज ,पिताजी आप माँ को यहाँ भेज दीजिए
नेपथ्य
चार लोगो का परिवार ,बेटा हाई स्कूल का क्षात्र
पिता के स्वर्ग वास के बाद
छोटे से गाँव से शहर में आकर बसना
युवक साधारण कारीगर ,मध्यम वर्गीय परिवार
माँ पत्नी और वो किराए का मकान
पत्नी गर्भ से ,पुत्र जन्म ,सारा परिवार हर्षित
घर में ख़ुशी की बहार ,दादी का प्यार
बालक का लालन पालन ,दादी का परलोक गमन
लडके का उच्च शिक्षा में चयन ,जिले का टोपर
बड़ी कम्पनी में में जौब ,ख़ुशी का माहौल
अच्छे घर से रिश्ता आना ,बेटे की धूम धाम से शादी
पत्नी भी जौब में दोनों की पोष्टिंग बड़े शहर में
माता पिता से
तीन चार माह में एक बार मिलने आना
फिर छ:माह में फिर वर्ष में एक बार
अब कई वर्षो से नहीं आए
वर्तमान
आज बेटे का इस तरह फोन आना
और माँ को बुलाना ,दोनों विचार मग्न
सारी उम्र जिस पुत्र के भविष्य के लिए खटे
अब तक रहे जिससे कटे ,उसका ये आमन्त्रण
सोचा चलो अब हम सब संग रहेंगे
पोते के संग कुछ समय बिताएँगे
कुछ दिन बाद फिर फोन ,हलो …..
पिता जी क्या सोचा, आप माँ को कब भेज रहे है
प्लीज माँ को भेज दीजिए
लगातार एक दो दिन की आड़ में फोन
एक दिन फिर फोन हलो ….हाँ बेटा हमने
विचार किया है हम दोनों आ रहे है
आप दोनों नही सिर्फ माँ को फोन रख दिया गया
कुछ दिन यूँ ही फोन आते रहे
फिर आने बंद हो गए
आज अचानक फिर फोन ,हलो ….
पिता जी आप क्यों जिद कर रहे हैं माँ को भेज
दीजिए ना प्लीज
सुनो बेटा मैं यहाँ बीमार रहता हूँ और तुम्हारी माँ
की तबियत भी ठीक नहीं रहती
हम एक दुसरे का ख्याल रख रहे है
इसलिए तुम्हारी माँ को अकेले नहीं भेज सकता
फोन बंद सन्नाटा
कुछ दिन बाद फिर घंटी बजी फोन …..
पिताजी मेरी मजबूरी को समझिए प्लीज माँ
को भेज दीजिए
बेटा हमारी बात ध्यान से सुनो तुम्हें माँ की नहीं
एक नौकरानी की जरूरत है सो वही पर जुगाड़ कर लो
मैं जनता हूँ तुम सक्षम हो दोनों जो कमाते हो
हमें हमारे हाल पर छोड़ दो
और आगे इसके लिए फोन मत करना
ठीक है पिताजी रखता हूँ
समय चक्र चलता रहा
बुढ़ापा तन्हा कटता रहा

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

budhe mata pita ,ma nahi noukrani chahie

budhe mata pita .ma nahi noukrani chahie
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One Comment

  1. एक गरीब मध्यम वर्गीय परिवार अपने लाडले को उच्च शिक्षा दिलाकर अपने लिए तन्हाई खरीद लेता है
    बेटे की नौकरी बहू की नौकरी उच्च महत्वाकांक्षा दोनों को बड़े शहर ले जाती है बच्चे होने के बाद होने
    वाली परेशानी से बचने के लिए वे एक नौकरानी रखने के बदले माँ को शहर बुलाने की प्लानिंग करते है
    पिता को फोन .पिता से रिक्वेस्ट पिताजी माँ को भेज दीजिए ,दोनों को बुलाने के लिए तैयार नही
    पिता की फटकर माँ को भेजने से इंकार तन्हा बुढ़ापा
    जन कवि गोपाल जी सोलंकी