मानसून की पहली आहट

  1. rain -b .mansoon ki pahli aahat
  2. mansoon aaya . man soon ki pahli aahat
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मान सून की पहली आहट
मान सून की आहट से ,खिले सभी के चेहरे
आसमान पर छाने लगे , बादल काले गहरे
मान सून की
तपते सूरज पर काली ,बदली ने चादर डाली
छुपा छुपी का खेल चला,दोनों में शाम सबेरे
मान सुन की
रूप धरा आंधी का हवा ने,बन वो तुंफा दौड़ी
धुल भरी आंधी का तांडव ,दिन में हुए अँधेरे
मान सून की
छप्पर टिप्पर उड़े, दौड़ो भागो ,का शोर मचा
भौजी दौड़ी उड़ ना जाए ,छत से कपड़े मेरे
मान सुन की
बड़ी बड़ी बूंदों के रूप में ,लगा बरसने पानी
हर्ष के मारे लगे नाचने ,खिले सभी के चेहरे
मान सून की
प्यासी धरा की प्यास बुझाने ,आई वर्ष रानी
भर जाएंगे ताल तलैया , और कुंवे सब गहरे
मान सून की
खेतो में अन्न फल फूल , पेड़ो पर हरियाली
जीवन दाई जल से देखो,धरती फिर से संवरे
मान सून की

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. मान सून की पहली आहट
    मान सून की आहट से ,खिले सभी के चेहरे
    आसमान पर छाने लगे , बादल काले गहरे
    मान सून की
    तपते सूरज पर काली ,बदली ने चादर डाली
    छुपा छुपी का खेल चला,दोनों में शाम सबेरे
    मान सुन की
    रूप धरा आंधी का हवा ने,बन वो तुंफा दौड़ी
    धुल भरी आंधी का तांडव ,दिन में हुए अँधेरे
    मान सून की
    mansoon ki pahli aahat
    jan kavi gopal ji solanki