मुंसी प्रेम चंद जयंती 31.7.2017

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मुंसी प्रेम चंद जयंती 31.7.2017
समाज में रहकर ,समाज से ,सरोकार ,रखती कहानियाँ
उस वक्त के ,समाज को ,प्रति बिम्बित, करती कहानियाँ
प्रेम चंद जी ने, लिखी ,देश गुलाम था ,जमींदारो का आतंक,
सेठ साहूकारों के ,जुल्मो सितम ,आम आदमी ,खेती किसानी ,
करने वाले छोटे खेतिहर ,गरीबी, और उनके जुल्मो सितम, से
पिस रहे थे |
उसके बाद भी, अपनी धरती, अपने देश, अपनी संस्कृति ,
के प्रति, उनका अनुराग, कम नहीं था |
वे हर तरह का, कष्ट उठाकर भी,
जीवन के प्रति, आशान्वित, नजरिया, रखते थे, एक दिन ,
भोर जरुर होगी |
देश आजाद होगा, हमें, इन जालिमो के ,चंगुल से, छुड़ाया,
जाएगा |
हम ,समाज में, इज्जत ,और सम्मान से, जी सकेंगे |
आज हम ,आजाद हैं|
किसान ,जमींदारो, साहुकारो ,के जाल से ,मुक्त है
आज, इकतीस जुलाई २०१७ को, हम, उन्हें ,
अपनी श्रद्धांजली,
Kavyapravah.com की ओर से प्रेषित करते है |

Jan kvi .gopal ji solanki

One Comment

  1. मुंसी प्रेम चंद जयंती 31.7.2017
    समाज में रहकर ,समाज से ,सरोकार ,रखती कहानियाँ
    उस वक्त के ,समाज को ,प्रति बिम्बित, करती कहानियाँ
    प्रेम चंद जी ने, लिखी ,देश गुलाम था ,जमींदारो का आतंक,
    सेठ साहूकारों के ,जुल्मो सितम ,आम आदमी ,खेती किसानी ,
    करने वाले छोटे खेतिहर ,गरीबी, और उनके जुल्मो सितम, से
    पिस रहे थे |
    munsi prem chand jaynti
    31.7.2017.
    jan kavi gopal ji solanki