मेरी बिटिया मेरी बिटिया

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मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मेरी जान मेरी धड़कन
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
अक्स हूँ मैं वो है दर्पण
देख रहा हूँ खुद को उसमे
धीरे धीरे घड़ रही अपने
अंदर मुझको हर क्षण
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मेरी जान मेरी धड़कन
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मन है उसका इतना निर्मल
जैसे गंगा जल हो शीतल
कभी मुस्काए कभी खिसियाए
रंग बदलती है वो पल पल
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मेरी जान मेरी धड़कन
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
वर के ले गया दूर जंवाई
ले गया धड़कन दिल की जंवाई
एक ख़ामोशी घर में छाई
बिखरी खुशियाँ जब फिर आई
मेरी बिटिया मेरी बिटिया
मेरी जान मेरी धड़कन
मेरी बिटिया मेरी बिटिया

जन कवि गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. meri bitiya .pita ko apni jan se pyari hoti hai bitiya uska dil uski dhdkta hai uski khushi uske gam se kbhi harshit kbhi dukhi or betiyan jyada tar apne pita ka prtirup hoti hai jb vi ghr se vida hoti hai tb kathor se kathor hridy pita bhi apne aansu nhin rok skte
    jan kavi .gopal ji solanki