मेरे वजूद में ही

  1. a.p.solanki .mere vajud me hi
  2. g.g.solanki .mere vajud me hi
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मेरे वजूद में ही
मेरे वजूद में ही , शायद उसका वजूद है
मैं हूँ मौजूद जब तक , वो भी मौजूद है
मेरे वजूद
अटकी हुई है सांसे, सांसों में मेरी उसकी
सीने में उसके ,मेरी ही, धडकन मौजूद है
मेरे वजूद
हर जंग जो थी मेरी ,दरअसल,लड़ी उसीने
मेरी हम कदम बराबर ,मेरे संग मौजूद है
मेरे वजूद
मेरे अधूरे पन को , पूरण किया है उसने
मेरे कल में भी वही थी,आज भी मौजूद है
मेरे वजूद
मेरे लिए ही शायद ,आई है वो धरा पर
मेरे रहते तक ही शायद,वो यहाँ मौजूद है
मेरे वजूद
सौ बार शुक्रिया , लाखों नमन है उसको
इस रूप में वो हरदम ,मेरे संग मौजूद है
मेरे वजूद

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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  1. मेरे वजूद में ही
    मेरे वजूद में ही , शायद उसका वजूद है
    मैं हूँ मौजूद जब तक , वो भी मौजूद है
    मेरे वजूद
    अटकी हुई है सांसे, सांसों में मेरी उसकी
    सीने में उसके ,मेरी ही, धडकन मौजूद है
    मेरे वजूद
    mere vajud me hi
    jan kavi gopal ji solanki