मैं एक स्कूल मास्टर[ शिक्षक दिवस ]

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मैं एक स्कूल मास्टर[ शिक्षक दिवस ]
मैं एक स्कूल मास्टर .अब भी यहीं खड़ा हूँ
जैसे नीव का पत्थर होता .ऐसा यहाँ गड़ा हूँ
मैं एक
मेरे पढाए बने कलेक्टर .मंत्री अफसर व्यापारी
घर खर्चा इसी से चलता .नौकरी की ये लाचारी
पहली  क्लास से धीरे धीरे .चौथी तक मैं चढ़ा हूँ
मैं एक
जिनको बेंत से मारा उन्हें .सम्मानित होते देख रहा
खुद चिंता  कर उन्हें  पढ़ाया . सदा  इरादा  नेक रहा
माता पिता से मिलकर उनकी .बेहतरी के लिए लड़ा हूँ
मैं एक
धीरे धीरे  ये  गाँव  हमारा . बड़े  शहर  में खो  गया
प्राइमरी  स्कूल हमारा . हाई  स्कूल  अब  हो गया
मेंरी नियति ना बदली .मील के पत्थर सा मैं गड़ा हूँ
मैं एक
एक दिन स्कूल में साफ.सफाई रंग रोगन होने लगा
करने निरिक्षण आएँगे कलेक्टर .चर्चा वहां होने लगा
पहले हाई फिर मिडिल वाले सर . आखिर में मैं खड़ा हूँ
मैं एक
बड़ा काफिला कार से उतरे .बंदन माला सत्कार हुआ
उतरे कार से चहूँओर निहारा .आकर मेरे चरण छुए
अवरुद्ध कंठ नयनो में आंसू .लगा आज मैं भी बड़ा हूँ
मैं एक
पैंसठ बरस यहीं पर गुजरे आज रिटायर हो जाऊँगा
सोचा लिया है जो ना सकते. स्कूल उन्हें मैं पढ़ाउंगा
मील के पत्थर सा था जीवन कदम एक मैं आज बढ़ा हूँ
मैं एक

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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  1. मैं एक स्कूल मास्टर[ शिक्षक दिवस ]
    मैं एक स्कूल मास्टर .अब भी यहीं खड़ा हूँ
    जैसे नीव का पत्थर होता .ऐसा यहाँ गड़ा हूँ
    मैं एक
    मेरे पढाए बने कलेक्टर .मंत्री अफसर व्यापारी
    घर खर्चा इसी से चलता .नौकरी की ये लाचारी
    पहली क्लास से धीरे धीरे .चौथी तक मैं चढ़ा हूँ
    मैं एक
    जिनको बेंत से मारा उन्हें .सम्मानित होते देख रहा
    खुद चिंता कर उन्हें पढ़ाया . सदा इरादा नेक रहा
    माता पिता से मिलकर उनकी .बेहतरी के लिए लड़ा हूँ
    jan kavi .gopal ji solanki