यमुना के तट पर [सावन ]

  1. savan-1. yamuna ke tat par
  2. savan jhula . yamuna ke tat par
  1. savan-1. yamuna ke tat par
  2. savan jhula . yamuna ke tat par

savan-1. yamuna ke tat par

savan-1. yamuna ke tat par
kavyapravah.com

savan jhula . yamuna ke tat par

savan jhula . yamuna ke tat par
kavyapravah.com

 

यमुना के तट पर [सावन ]
यमुना के तट पर, कदम्ब, की डाल पर
रेशम की ,डोरी से, झूलो, बंध रयो है
लगे ग्वाल, बाल सब ,उमंग से, भरे हुए
याकी अगुआई ,खुद, कान्हा ,कर रयो है
यमुना के तट पर
सखियों के संग, सज धज, कर, आई राधा
पायलों की ,रुन झुन ,मस्ती ,भर रयो है
सावन भी, रिम झिम, ठंडी, फुहारों से
मौसम में, एक नई, मस्ती, भर रयो है
यमुना के तट पर
बैठी है ,झूले में, राधा ,सखियाँ ,झुलाने लगी
ऊँचे, स्वर में, सावन को ,गीत ,चल रयो है
कान्हा भी, बिराज गए, राधिका, के संग जब
कुक रही ,कोयलिया, मोर, नाच रयो है
यमुना के तट पर
देख के ,युगल छवि ,हो गए, निहाल सभी
वृन्दावन से, आज ,स्वर्ग, फीको ,लग रयो है
सावन के, झूले में ,झूले है, गोपाल राधे
देख देख ,इनको ,सारो ,ब्रज, झूम रयो है
यमुना के तट पर

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. यमुना के तट पर [सावन ]
    यमुना के तट पर, कदम्ब, की डाल पर
    रेशम की ,डोरी से, झूलो, बंध रयो है
    लगे ग्वाल, बाल सब ,उमंग से, भरे हुए
    याकी अगुआई ,खुद, कान्हा ,कर रयो है
    यमुना के तट पर
    सखियों के संग, सज धज, कर, आई राधा
    पायलों की ,रुन झुन ,मस्ती ,भर रयो है
    सावन भी, रिम झिम, ठंडी, फुहारों से
    मौसम में, एक नई, मस्ती, भर रयो है
    यमुना के तट पर
    yamuna ke tat par [savan]
    jan kavi .gopal ji solanki