वो जो उदास रहती थी

  1. hema . vo jo udas rahti thi
  2. spna mera . vo jo udas rahti thi
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hema .vo jo udas rahti thi
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spna mera . vo jo udas rahti thi

spna mera .vo jo udas rahti thi
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वो जो उदास रहती थी

हर घड़ी जो उदास रहती थी

आज कल मुस्कुरा रही है वो

कल तक तो,खामोशियों,की

मूरत थी

आज कल बहुत ,गुनगुना ,

रही है वो

मुस्किल है अंदर की ख़ुशी

को छुपाना

अनसोचा आनचाहा अचानक

मिल जाना

मुस्कुराती है अचानक लजा

जाती है

चौंक कर देखती इधर उधर

सम्भल जाती है

भरती थी जिसे देख ठंडी आहें

मान गया है वो

उसके छुपे जज्बातों को जान

गया है वो

इसीसे हट गई उदासी उसकी

इसीलिए मुस्कुरा रही है वो

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी   

One Comment

  1. वो जो उदास रहती थी
    हर घड़ी जो उदास रहती थी
    आज कल मुस्कुरा रही है वो
    कल तक तो,खामोशियों,की
    मूरत थी
    आज कल बहुत ,गुनगुना ,
    रही है वो
    मुस्किल है अंदर की ख़ुशी
    को छुपाना
    vo jo udas rahti thi
    jan kvi .gopal ji solanki
    जन कवि .गोपाल जी सोलंकी