वो ले गए मेरी चैन

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वो ले गए मेरी चैन
नजरें ढूंडती है उन्हें जो, ले गए मेरी चैन
व्याकुल उनके दरस को , प्यासे मेरे नैन
नजरें
अब आंखों में नींद नहीं ,ना मन में है चैन
खोया खोया सा फिरूं , रहता हूँ बे चैन
नजरें
जाने कब सपड़ाएंगे , सोचूं ये दिन रैन
होगी बरामद या नहीं , उनसे मेरी चैन
नजरें
पढ़ता हूँ अखबार में , लूटे वे नित चैन
अब पछताऊं क्यों पहनी ,मैंने उस दिन चैन
नजरें
लगता था मासूम वो , लूट गया जो चैन
जब पकड़ाएगा तो सर , कूटेंगे वालदैन
नजरें
पढने लिखने की उमर , हाथो में हो पैन
व्यसन बुरा लगा उन्हें , लूट रहे है चैन
नजरें
छूट भले बच्चों को दो , रक्खो उन पर नैन
इज्जत के संग धोएँगे , जीवन का सुख चैन
नजरें

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. वो ले गए मेरी चैन
    लगता था मासूम वो , लूट गया जो चैन
    जब पकड़ाएगा तो सर , कूटेंगे वालदैन
    नजरें
    पढने लिखने की उमर , हाथो में हो पैन
    व्यसन बुरा लगा उन्हें , लूट रहे है चैन
    नजरें
    छूट भले बच्चों को दो , रक्खो उन पर नैन
    इज्जत के संग धोएँगे , जीवन का सुख चैन
    नजरें
    जन कवि .गोपाल जी सोलंकी