वो वर्षा का पानी वो कागज की कस्ती

  1. bachpana -vo vrsha ka pani vo kagj ki kasti
  2. bachpan suhana .vo vrsha ka pani vo kagj ki kasti
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वो वर्षा का पानी  , वो कागज की कस्ती

वो दोस्तों की टोली वो आपस की मस्ती
लिए अपने हाथों सब ,कागज की कस्ती
वो वर्षा
वो वर्षा झमा झम ,जब भी है बरसती
निकल पड़ते घरों से,ले कागज की कस्ती
वो वर्षा
बनी नदिया सड़क ,डाली कागज की कस्ती
कौन सी दूर जाएगी, शर्तें आपस में लगती
वो वर्षा
वो घटा काली अब भी, झमा झम बरसती
बनी सड़क नदिया पर,ना कागज की कस्ती
वो वर्षा
व्यस्त है आज बचपन , नहीं उनमे मस्ती
बढ़ा बोझ बस्तों का ,शाम कोचिंग में कटती
वो वर्षा
बने क्रूर पालक और , बचपना उसमे पिसती
टापर रहे स्कूल का ,या नजर टैलेंट पे रहती
वो वर्षा
सोने के महलो में , बचपन कहां पाए मस्ती
मुस्कान के बदले मुख,पर थकान और पस्ती
वो वर्षा
लौटा दो बच्चो को,उनका बचपन और मस्ती
दिखे उनके हाथो फिर वो, कागज की कस्ती
वो वर्षा

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

 

One Comment

  1. वो वर्षा का पानी , वो कागज की कस्ती

    वो दोस्तों की टोली वो आपस की मस्ती
    लिए अपने हाथों सब ,कागज की कस्ती
    वो वर्षा
    वो वर्षा झमा झम ,जब भी है बरसती
    निकल पड़ते घरों से,ले कागज की कस्ती
    वो वर्षा
    बनी नदिया सड़क ,डाली कागज की कस्ती
    कौन सी दूर जाएगी, शर्तें आपस में लगती
    वो वर्षा
    वो घटा काली अब भी, झमा झम बरसती
    बनी सड़क नदिया पर,ना कागज की कस्ती
    वो वर्षा
    व्यस्त है आज बचपन , नहीं उनमे मस्ती
    बढ़ा बोझ बस्तों का ,शाम कोचिंग में कटती
    वो वर्षा
    बने क्रूर पालक और , बचपना उसमे पिसती
    टापर रहे स्कूल का ,या नजर टैलेंट पे रहती
    वो वर्षा
    jan kavi .gopal ji solanki