शंख नाद [प्रेम चंद ]

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शंख नाद [प्रेम चंद ]
मुंसी प्रेम चंद की कहानी से प्रेरित
भानू सिंह चौधरी नाम था ,रौब था पुरे गाँव
गाँव के मुखिया होने से, सब पड़ते थे पाँव
गाँव के सभी बखेड़ो को ,मिनटों में सुलझाते
दरोगा जी का भी ना चलता, उनके आगे दांव
कोर्ट कचहरी के झंझट से ,बच जाता था गाँव
इस सेवा के बदले सभी ,कुछ दे जाते थे भेंट
जमे हुए थे अपने हक में, उनके अंगद से पांव
अब चौधरी जी के कुछ ,परिवार का हाल सुनाए
बड़का बितान सिंह ,मंझला, शान सिंह ,छुटका गुमानसिंह  
बड़का मामले सुलझाने में, आता चौधरी के काम
बदले में ले लेता था, किसानो से उसका दाम
मंझला खेतो का रखवाल था, करता खूब संभाल
बड़े ध्यान से अन्न उपजाता ,लाता घर में मॉल
छोटा था मनमौजी किस्म का, हट्टा कट्टा जवान
नाटक नौटंकी गाना कुस्ती ,उसके बहुत मितान
नाकारा की मिली हुई थी ,उनको घर में उपाधी
घर की चाकरी करती पत्नी, बन कर के अपराधी
बहुत झिड़कती रोती रूठती ,चलता न कोई उपाय
सहती थी सबके ताने, होकर के वो निरुपाय
आखिर पिता ने कहा डांटकर, तब बोले गुमान
ऐसा काम करा दो जिससे, घटे ना हमरी शान
कपड़े की दुकान खोल कर ,सुरु कर दिया काम
चौधरी क्लाथ स्टोर्स रख दिया, उसका सुंदर नाम
मित्रो की तो निकल पड़ी ,सब मिल मौज उड़ाते
हुआ खजाना खाली माल ,उधार कहां तक लाते
ढाक के तीन पात हो गए ,फिर से वो बेरोजगार
लगी भाभियाँ देने ताना ,सुनने को लाचार
बंटवारे की बात उठी ,चौधरी का फटा कलेजा
दोनों बेटो की बात सही, क्यों सहें उसे वो बेजा
तभी खोमचे वाले ने आ, द्वार पे हांक लगाई
बच्चे बड़े सभी को भाती, गुरदीन की मिठाई
दौड़ पड़े सब बच्चे जाकर, खोमचा उसका घेरा
हर कोई कुछ लेने लगा ,जम गया उसका डेरा
मुझे भी लेनी है मिठाई ,गुमान का बेटा मचला
कहां से लाऊं पैसे पीट ,उसे रोने लगी वो अबला
पसर गया धरती पर लड़का ,मुझे मिठाई लेदो
थोड़ी सी ही ले आऊंगा ,पैसे मुझको देदो
सुन गुमान का फटा कलेजा ,अंतर उसका जागा
उसके होते हुए बना है बेटा ,उसका अभागा
इस घटना ने पैदा करदी ,उसके मन में आग
मैं भी कमाऊंगा पैसे, किया उसने शंख नाद
कहते है जब जागे तभी सबेरा ,पत्नी उसकी मुस्काई
ढूंढ ढांढ कर कहीं से पैसे, बच्चे के लिए वो लाइ
जय जोहार, पूर्ण हुआ ,प्रेम चंद का ,शंख नाद

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

One Comment

  1. shnkh nad
    munsi prem chand ki khaniyo me ek khani hai shnkh nad ,jo ek snyukt privar pr aadharit hai isme choudhri bhanu sinh jo ki ganv ke mukhiya bhi hai ,
    unke tin bete hai ,do to kam dham krte hai ,tisra mn mouji svbhav ka hai or kam dham se bejar dosto ke sath apna samay vyatit krta hai uski ptni uske nkare pan se preshan rhti hai sbke tane sunti hai ghr ka sara kam karti hai fir ek din uske bchche ko mithai ke lie mchlte dekh kar or khud ki jeb tng dekh kar uska svabhiman jagrt hota hai or vah paise kmane ka shnkh nad krta hai |