सांचा दर्शन

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सांचा दर्शन
खोल दे पट को ओ पुजारी ,दर्शन जरा करादे
मुरली मनोहर सांवरे की ,झलक हमें दिखादे
खोल दे पट को
जब से मैंने होश सम्भला,दर्शन करती आई हूँ
गिरते पड़ते दौड़ते भगते ,मन्दिर में मैं आई हूँ
आज जरा सी चूक हो गई ,बंद मिले दरवाजे
खोल दे पट को
जिसकी मर्जी से जग चलता,उस पर मर्जी तेरी है
क्या पहने ये क्या खाएंगे, यहाँ हुकूमत तेरी है
कैसा है सिंगर आज का ,थोड़ी झलक दिखादे
खोल दे पट को
सदर बीच गोपाल मन्दिर में , राधा संग बिराजे
भजन करे सब भक्त मगन हो ,ढोल मंजीरा बाजे
दर्शन की प्यासी है अंखियां,प्यास जरा तु बुझादे
खोल दे पट को
पट ये अब ना खुलेंगे ,पट हृदय के तुम खोलो 
दर्शन करना है तो ,बंद नयन को तुम करलो 
पल पल दर्शन करना उनके ,वहां नहीं दरवाजा
खोल दे पट को

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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  1. सांचा दर्शन
    खोल दे पट को ओ पुजारी ,दर्शन जरा करादे
    मुरली मनोहर सांवरे की ,झलक हमें दिखादे
    खोल दे पट को
    जब से मैंने होश सम्भला,दर्शन करती आई हूँ
    गीते पड़ते दौड़ते भगते ,मन्दिर में मैं आई हूँ
    आज जरा सी चूक हो गई ,बंद मिले दरवाजे
    खोल दे पट को
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