सुरता तोर आथे

  1. c.g.hiro aniuj .surta tor aathe
  2. c.g.hiro hiroin . surta tor aathe
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सुरता तोर आथे
सुरता तोर आथे फेर, नींद कहां आथे
कैसे देखौं सपना ,तोर झपकी नई आथे
सुरता तोर
अबड़ दिन रहिगे तैं , मइके संगवारी रे
कब खनके चूड़ी तोर ,ताकत रर्हिथौ द्वारी रे
आस मोर टूटे निराशा,तन मन मा छाथे
सुरता तोर
दीवाना होगे देवर ,मोला ,भौजी बिजराथे रे
संगी मितान मन संग, जियरा ना लगे रे
संगी मन के व्यंग बाण, हिया भेद जाथे
सुरता तोर
चैन मोर लूट के तैं , कहां लुकागे रे
सोचे नहीं रहेंव मोला , ऐसन सताबे रे
तोर रुख ला देख हिया ,अबड़ घबराथे
सुरता तो
दिल मा समा के पहिली ,मया जगाथे रे
फेर बन के बैरी वो ही, जियरा जलाथे रे
प्यार में बौराए भौरा,सन हिया गुन्गुनाथे
सुरता तोर

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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