हमारी सड़क और [सरकारी इंतजाम

बहुत समय से हल्ला मचा था
निगम का सारा अमला लगा हुआ था
वर्षा के पहले नालो की सफाई करने
थोडा सा पानी बरसते ही लगता है
निचली बस्तियों में जल भरने
लो बरसात का मौसम आ गया
काले मेघो का दल लाव लश्कर के संग छा गया
बादल लगे गरजने गड़ गड़ बिजली लगी चमकने
छा गया घुप अँधेरा बादल लगे बरसने
आसमान भी पूरा साफ़ है सूरज लगा चमकने
घर से निकलने लगे लोग चले काम पर अपने
धुली धुली सी सडकें है शायद बरसात हो चुकी थी
सड़कों पर बड़े बड़े गढ्ढे जिनमे पानी भर चुकी थी
हिचकोले खाते वाहन पानी नुमा कीचड से लबालब
भरे हुए गड्ढे बच्चे कूद रहे थे उनमे धप धप
तभी एक कार का गुजरना और उसके चक्के का
गड्ढे में जाना कीचड का उछलना और पास से
गुजरते हुए राहगीर का कीचड़ से सराबोर होना
बरसात में रोज की बात है और गाली देना
लोग घरों से अच्छी तरह नहा कर नहीं निकलते
इसलिए यह सरकारी इतजाम है | कोई शक
जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

Comments

comments

Posted in: