हिंदी से प्रेम करो देश वाशियों

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हिंदी से प्रेम करो

देश वाशियों ,हिंदी से प्रेम करो,

देश वाशियों

जानो ,अपनी हस्ती को, पहचानो

सब की, जननी संस्कृत ,है मानो

देश वाशियों हिंदी से

इसी,संस्कृत,से जन्मी अपनी हिंदी

भारत,माँ के, माथे की है ये बिंदी

देश वाशियों हिंदी से     

पावन, गंगा जमुना है अपनी हिंदी

सबको ,लेकर चलती है ये कालिंदी

देश वाशियों हिदी से

इसमें ,अपना पन, प्यार गर्व होगा

इसमें,पराए पन का बोध नहीं होगा

देश वाशियों हिंदी से    

हिंदी,जन जन की बनी आज प्यारी

हिंदी,जाने समझे अब दुनिया सारी

देश वाशियों हिंदी से  

हम पर ,इंग्लिश, ये थोपी गई है

इस पर ,निर्भरता, इज्जत नहीं है

देश वाशियों हिंदी से

त्यागो,इंग्लिश के मोह को त्यागो

नन्हे ,  बच्चों पर ना इसे लादो

देश वाशियों हिंदी से

मिडिया ,नेट, प्यारी सबको हिंदी

हिंदुस्तान ,की पहचान है ये हिंदी

देश वाशियों हिंदी से

जन कवि गोपाल जी सोलंकी    

One Comment

  1. हिंदी से प्रेम करो देश वाशियों
    १४ सितम्बर को वर्ल्ड हिंदी दिवस के अवसर पर पुरे देश में हिंदी पखवाड़ा एक सरकारी और साहित्यक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है खूब हिंदी का गुणगान होता है उसकी दशा दिशा पर मंथन किया जाता है खूब आंसू भए जाते है पर ये संकल्प नहीं लिया जाता की अब हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में भर्ती नहीं होंगे |मनाते रहो उत्सव ,भाते रहो आंसू ,हिंदी तुम्हारे आंसुओ की सहानुभूति की मोताज नहीं है एक दिन वह खुद अपना सिंहासन इंग्लिश से छीन लेगी जैसे हमने अंग्रेजो से आजादी छीन ली |जय हिन् जय भारत
    जन कवि .गोपाल जी सोलंकी