हुई सुनहरी भोर

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  2. chidiya rani . hui sunahari bhor
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हुई सुनहरी भोर
धरती सुनहरी हो गई ,हुई सुनहरी भोर
चिड़िया चहकी, कोयल कूकी ,नाचे मोर
धरती सुनहरी
सब जीवो में जगी चेतना, होने लगा शोर
दाना चुगने निकले,सब अपनी अपनी ठौर
धरती सुनहरी
ठंडी सुगन्धित हवा बह रही ,है चहूँ ओर
बच्चे बस्ते लेकर निकले ,स्कूल की ओर
धरती सुनहरी
दादा पोता दोनों चले , दुकान की ओर
जल्दी जल्दी भैया भागे,ऑफिस की ओर
धरती सुनहरी
तप कर दिनकर चले,अस्ताचल की ओर
संध्या की लाली दिखी, बढ़ा अँधेरा घोर
धरती सुनहरी 
नई उमंगे फिर लाएगी,होगी सुनहरी भोर
चिड़िया चहके, कोयल कूके, नाचेगा मोर
धरती सुनहरी

जन कवि .गोपाल जी सोलंकी

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    धरती सुनहरी
    सब जीवो में जगी चेतना, होने लगा शोर
    दाना चुगने निकले,सब अपनी अपनी ठौर
    धरती सुनहरी
    ठंडी सुगन्धित हवा बह रही ,है चहूँ ओर
    बच्चे बस्ते लेकर निकले ,स्कूल की ओर
    धरती सुनहरी
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