Tag Archives: gribi

  • gopal ji solanki

    आदमी की चादर

      खीच रहा उपर को चादर सच से रूबरू अब ये होगा | चादर उसकी छोटी है पांव सिकोड़ के सोना होगा | खीच रहा उपर ………………………………………………… घर का खर्च चलाने खातिर लम्बी लिस्ट बनाते है | कुछ जरूरी छूट ना जाए फिर से उसे मिलाते है | फिर ये जेब चेतावनी देती इसको छोटी […]